कुंडलिनी योग-आत्मशक्ति का आरोहण
कुंडलिनी योग वह आध्यात्मिक साधना है जिसमें रीढ़ की हड्डी के मूल (मूलाधार चक्र) में स्थित सुप्त दिव्य शक्ति कुंडलिनी को जाग्रत किया जाता है।य…
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कुंडलिनी योग वह आध्यात्मिक साधना है जिसमें रीढ़ की हड्डी के मूल (मूलाधार चक्र) में स्थित सुप्त दिव्य शक्ति कुंडलिनी को जाग्रत किया जाता है।य…
ज्ञान योग आत्मज्ञान और सत्य की अनुभूति का मार्ग है। यह योग मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर तथा बंधन से मुक्ति की ओर ले जाता है। इसमें बुद्धि…
1️⃣ भक्ति योग का अर्थ भक्ति का अर्थ है — अनन्य प्रेम, विश्वास और समर्पण।भक्ति योग वह साधना है जिसमें साधक अपने अहंकार, इच्छा और स्वार्थ को …
1. हठ योग का अर्थ हठ योग दो शब्दों से मिलकर बना है— ह = सूर्य (ऊर्जा, सक्रियता) ठ = चंद्र (शांति, स्थिरता) हठ योग का उद्देश्य शरीर में स…
1. सृजन और चेतना के आधार प्रभु चेतन और अचेतन दोनों को जीवन देने वाले प्रभु सर्वशक्तिमान हैं।उनकी शक्ति से ही निर्जीव में भी गति और चेतना का…
1. सृजनकर्ता ईश्वर ईश्वर ही इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड के सृजनकर्ता हैं।जड़ और चेतन, दृश्य और अदृश्य—सब उन्हीं की रचना है।सूर्य, चंद्र, पृथ्वी औ…
1. पंचतत्व: सृष्टि के मूल आभूषण अग्नि, जल, वायु, धरती और आकाश—ये पाँच तत्व समस्त प्राणियों के लिए आभूषण समान हैं।इनसे ही जीवन की रचना, संरक…
1. मकड़ी और उसका जाल: आत्मनिर्भर सृजन मकड़ी अपने ही शरीर से निकले द्रव्य से जाल का निर्माण करती है।यह जाल न बाहर से आता है, न किसी और पर नि…