धैर्य और करुणा

धैर्य और करुणा

1. सृजन और चेतना के आधार प्रभु

चेतन और अचेतन दोनों को जीवन देने वाले प्रभु सर्वशक्तिमान हैं।
उनकी शक्ति से ही निर्जीव में भी गति और चेतना का संचार होता है।
संपूर्ण सृष्टि उनके आदेश से संचालित होती है।
जीव, वनस्पति और प्रकृति सब उन्हीं की देन हैं।
प्रभु ही जीवन का मूल स्रोत और आधार हैं।

2. पृथ्वी समान शांत और धैर्यशील प्रभु

प्रभु पृथ्वी की भांति अत्यंत शांत और सहनशील हैं।
वे सबका भार उठाकर भी कभी विचलित नहीं होते।
उनकी शांति में असीम करुणा समाहित है।
पाप और पुण्य दोनों को समान भाव से धारण करते हैं।
उनका धैर्य सृष्टि के लिए आश्रय है।

3. अडिग और अटल स्वरूप

सर्दी, गर्मी और वर्षा में पृथ्वी की तरह प्रभु अटल रहते हैं।
परिस्थितियाँ बदलती हैं, पर उनका स्वरूप स्थिर रहता है।
संकट में भी वे धैर्य और स्थिरता का संदेश देते हैं।
उनकी अडिगता विश्वास को मजबूत करती है।
प्रभु का स्थायित्व सृष्टि को संतुलन देता है।

4. सहनशीलता और समता के प्रतीक

जैसे पृथ्वी सभी को समान स्थान देती है, वैसे ही प्रभु सबको अपनाते हैं।
वे किसी में भेद नहीं करते, सब पर समान कृपा करते हैं।
कष्ट सहकर भी वे पालन करना नहीं छोड़ते।
उनकी सहनशीलता मानव को संयम सिखाती है।
प्रभु समता और न्याय के सच्चे प्रतीक हैं।

5. गुणों से सम्पन्न पालनहार प्रभु

प्रभु करुणा, धैर्य और स्थिरता से परिपूर्ण हैं।
उनके गुणों से ही संसार में संतुलन बना रहता है।
वे जीवन को दिशा और उद्देश्य प्रदान करते हैं।
प्रकृति के माध्यम से वे अपने गुण प्रकट करते हैं।
ऐसे प्रभु सदा वंदनीय और पूजनीय हैं।