मंगल अनुष्ठान

मंगल अनुष्ठान — जीवन के हर मंगल क्षण में

मानव जीवन अनेक पड़ावों और विशेष अवसरों से भरा हुआ है—जन्म, शिक्षा, विवाह, गृहप्रवेश, संतानों का संस्कार, समाज-सेवा या कोई भी जीवन की उपलब्धि। हर ऐसे अवसर पर परिवार और समाज एकत्र होकर सुख, शांति और शुभता की कामना करता है। इसी परंपरा को सशक्त बनाने हेतु रूद्र महासंघ ने एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का रूप दिया है, जिसे हम “मंगल अनुष्ठान” कहते हैं।

मंगल अनुष्ठान

परिचय

“मंगल अनुष्ठान” केवल पूजन या कर्मकाण्ड नहीं है, बल्कि यह आत्मा और समाज दोनों को जोड़ने वाला उत्सव है। इसमें पूजन, ध्यान, हवन, कीर्तन, और दीक्षा सबको सम्मिलित किया गया है, ताकि हर मांगलिक अवसर केवल बाहरी उत्सव न रहकर आत्मिक उत्थान और जीवन को नए संस्कार देने का माध्यम बने।

इस अनुष्ठान का उद्देश्य है—

  • परिवार में शांति और समृद्धि का संचार करना,
  • समाज में सद्भाव और सहयोग की भावना जगाना,
  • और प्रत्येक व्यक्ति को आध्यात्मिकता और सेवा के मार्ग पर प्रेरित करना।

मंगल अनुष्ठान के मुख्य अंग

  • मंगल पूजन – घर या समाज में अल्पना निर्माण, कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन, गुरु पूजन, हवन और मंगल मंत्रोच्चार।
  • सामूहिक ध्यान एवं कीर्तन – सभी प्रतिभागी मिलकर शाश्वत से जुड़ें और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करें।
  • रूद्र दीक्षा संस्कार – इच्छुक व्यक्तियों को सरल मंत्र दीक्षा दी जाती है ताकि वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा को प्रारम्भ या सशक्त कर सकें।
  • आशीर्वचन एवं संकल्प – संत या महासंघ प्रतिनिधि परिवार को मंगल आशीर्वाद देते हैं और सभी को सेवा, करुणा व प्रेम का संकल्प दिलाते हैं।
  • प्रसाद और आनंदोत्सव – सामूहिक भोजन/प्रसाद और हर्षोल्लास के साथ कार्यक्रम का समापन।

मूल भाव

“मंगल अनुष्ठान” का मूल भाव है— 👉 हर अवसर को शाश्वत की कृपा और आत्मिक विकास का उत्सव बना देना। यह अनुष्ठान किसी भी जाति, धर्म, संप्रदाय या परंपरा की सीमाओं में बंधा नहीं है। यह सबके लिए है—क्योंकि मंगल और प्रेम किसी एक का नहीं, संपूर्ण मानवता का अधिकार है।

मंगल अनुष्ठान • Mangal Anusthan

प्रत्येक पूर्णमा रात 6:00 - 7:30 बजे / Every Full Moon Night 6:00 - 7:30 PM

Time / समय Activity / क्रियाएँ
6:00 - 6:30 PM शांति पाठ / Shanti Path
6:30 - 7:00 PM हवन / Hawan
7:00 - 7:30 PM ध्यान एवं प्रार्थना / Dhyan and Prayers / Guided Meditation