मानव जीवन अनेक पड़ावों और विशेष अवसरों से भरा हुआ है—जन्म, शिक्षा, विवाह, गृहप्रवेश, संतानों का संस्कार, समाज-सेवा या कोई भी जीवन की उपलब्धि। हर ऐसे अवसर पर परिवार और समाज एकत्र होकर सुख, शांति और शुभता की कामना करता है। इसी परंपरा को सशक्त बनाने हेतु रूद्र महासंघ ने एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का रूप दिया है, जिसे हम “मंगल अनुष्ठान” कहते हैं।
“मंगल अनुष्ठान” केवल पूजन या कर्मकाण्ड नहीं है, बल्कि यह आत्मा और समाज दोनों को जोड़ने वाला उत्सव है। इसमें पूजन, ध्यान, हवन, कीर्तन, और दीक्षा सबको सम्मिलित किया गया है, ताकि हर मांगलिक अवसर केवल बाहरी उत्सव न रहकर आत्मिक उत्थान और जीवन को नए संस्कार देने का माध्यम बने।
“मंगल अनुष्ठान” का मूल भाव है— 👉 हर अवसर को शाश्वत की कृपा और आत्मिक विकास का उत्सव बना देना। यह अनुष्ठान किसी भी जाति, धर्म, संप्रदाय या परंपरा की सीमाओं में बंधा नहीं है। यह सबके लिए है—क्योंकि मंगल और प्रेम किसी एक का नहीं, संपूर्ण मानवता का अधिकार है।
प्रत्येक पूर्णमा रात 6:00 - 7:30 बजे / Every Full Moon Night 6:00 - 7:30 PM
| Time / समय | Activity / क्रियाएँ |
|---|---|
| 6:00 - 6:30 PM | शांति पाठ / Shanti Path |
| 6:30 - 7:00 PM | हवन / Hawan |
| 7:00 - 7:30 PM | ध्यान एवं प्रार्थना / Dhyan and Prayers / Guided Meditation |