1. सृजनकर्ता ईश्वर
ईश्वर ही इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड के सृजनकर्ता हैं।
जड़ और चेतन, दृश्य और अदृश्य—सब उन्हीं की रचना है।
सूर्य, चंद्र, पृथ्वी और समस्त जीव उनके आदेश से संचालित हैं।
सृष्टि की हर रचना में उनकी शक्ति और बुद्धि का प्रतिबिंब है।
वे आदि भी हैं और अंत भी, उनके बिना कुछ भी संभव नहीं।
2. ज्ञान और समझ प्रदान करने वाला प्रभु
ईश्वर ही मनुष्य को सीखने और समझने की क्षमता देते हैं।
बुद्धि, विवेक और ज्ञान उन्हीं की कृपा से विकसित होते हैं।
अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला प्रकाश वही हैं।
सही और गलत का बोध कराने वाले परम गुरु वही हैं।
उनकी कृपा से ही मानव चिंतनशील प्राणी बनता है।
3. मन और विचारों के प्रेरणास्रोत
मन में उठने वाले श्रेष्ठ विचारों के मूल में ईश्वर होते हैं।
सद्भाव, करुणा और प्रेम की भावना वही उत्पन्न करते हैं।
नकारात्मकता से ऊपर उठने की शक्ति वही देते हैं।
मन को नियंत्रित और शांत करने का मार्ग भी वही दिखाते हैं।
मानव चेतना का संचालन ईश्वर की ही लीला है।
4. पालनकर्ता और जीवनदाता ईश्वर
ईश्वर सभी प्राणियों की देखरेख करने वाले पालनहार हैं।
वे ही जीवन देते हैं और जीवन की रक्षा भी करते हैं।
हर श्वास, हर धड़कन उन्हीं की अनुकंपा से चलती है।
सुख-दुख के क्षणों में वही हमारा सहारा बनते हैं।
उनकी करुणा से ही सृष्टि संतुलन में बनी रहती है।
5. प्रभु के अतुलनीय गुण
ईश्वर के गुण अनंत और अतुलनीय हैं।
वे दयालु, करुणामय, क्षमाशील और सर्वशक्तिमान हैं।
उनकी महिमा का पूर्ण वर्णन संभव नहीं।
वे सबके भीतर रहते हुए भी सबसे परे हैं।
प्रभु की भक्ति ही जीवन को सार्थक बनाती है।