कुंडलिनी योग वह आध्यात्मिक साधना है जिसमें रीढ़ की हड्डी के मूल (मूलाधार चक्र) में स्थित सुप्त दिव्य शक्ति कुंडलिनी को जाग्रत किया जाता है।
यह शक्ति सर्पिणी के समान कुंडलित अवस्था में रहती है, इसलिए इसे कुंडलिनी कहा जाता है।
जब यह शक्ति जाग्रत होकर सुषुम्ना नाड़ी से ऊपर उठती है और सहस्रार चक्र तक पहुँचती है, तब साधक को आत्मबोध और ब्रह्मानुभूति होती है।
2. कुंडलिनी शब्द का अर्थ
कुंडल = कुंडली मारी हुई
कुंडलिनी = कुंडली मारी हुई शक्ति
यह जीवनी शक्ति (Life Force Energy) का ही सूक्ष्मतम रूप है
3. कुंडलिनी योग का उद्देश्य
आत्मशक्ति का जागरण
चक्रों का शुद्धिकरण
चेतना का विस्तार
भय, क्रोध, वासना पर नियंत्रण
आत्मज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति
4. कुंडलिनी योग का आधार तंत्र
कुंडलिनी योग मुख्यतः इन तत्वों पर आधारित है:
चक्र प्रणाली
नाड़ी तंत्र
प्राण ऊर्जा
मंत्र शक्ति
ध्यान और बंध
5. सात चक्र और कुंडलिनी का आरोहण
| क्रम | चक्र | स्थान | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 1 | मूलाधार | रीढ़ का आधार | स्थिरता, सुरक्षा |
| 2 | स्वाधिष्ठान | नाभि के नीचे | सृजन, भावनाएँ |
| 3 | मणिपूर | नाभि | शक्ति, आत्मविश्वास |
| 4 | अनाहत | हृदय | प्रेम, करुणा |
| 5 | विशुद्ध | कंठ | शुद्धता, वाणी |
| 6 | आज्ञा | भौंह मध्य | अंतर्दृष्टि |
| 7 | सहस्रार | मस्तक शीर्ष | ब्रह्मज्ञान |
(क) शारीरिक तैयारी
यम–नियम का पालन
सात्त्विक आहार
ब्रह्मचर्य और संयम
(ख) प्राणायाम
नाड़ी शोधन
कपालभाति
भस्त्रिका
(ग) आसन
पद्मासन
सिद्धासन
वज्रासन
(घ) बंध और मुद्रा
मूल बंध
उड्डियान बंध
जालंधर बंध
महा मुद्रा
(ङ) मंत्र साधना
“ॐ”
“सोऽहम्”
“ॐ नमः शिवाय”
(च) ध्यान
आज्ञा चक्र ध्यान
सुषुम्ना ध्यान
7. कुंडलिनी जागरण के लक्षण
शरीर में कंपन या गर्मी
ध्यान में प्रकाश दर्शन
सहज आनंद
भय और मोह का क्षय
चेतना की तीव्रता
⚠️ ध्यान दें: गलत विधि से जागरण करने पर मानसिक असंतुलन भी हो सकता है।
8. कुंडलिनी योग के लाभ
आत्मबल की वृद्धि
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
मानसिक शांति
इच्छाशक्ति का विकास
आध्यात्मिक उन्नति
9. कुंडलिनी योग में सावधानियाँ
बिना गुरु के अभ्यास न करें
जल्दबाजी न करें
नशा, तामसिक भोजन से दूर रहें
शुद्ध आचरण अनिवार्य
10. कुंडलिनी योग का सार
“जब सोई हुई शक्ति जागती है, तब मनुष्य स्वयं को पहचानता है।”
कुंडलिनी योग केवल शरीर का नहीं, बल्कि आत्मा का जागरण है।
यह मार्ग धैर्य, श्रद्धा और गुरु कृपा से ही सफल होता है।