राज योग — आत्मा का राज्याभिषेक

राज योग — आत्मा का राज्याभिषेक

राज योग को योगों का राजा कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे मन के नियंत्रण, आत्मसंयम और आत्मसाक्षात्कार से संबंधित है।
महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योगसूत्र राज योग का प्रमुख ग्रंथ है।

 राज योग की परिभाषा

राज योग वह मार्ग है जिसमें चित्त (मन) की वृत्तियों को नियंत्रित करके साधक आत्मज्ञान और समाधि की अवस्था को प्राप्त करता है।

“योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः”
अर्थात् योग = मन की चंचल वृत्तियों का निरोध

 राज योग का उद्देश्य

मन को स्थिर करना

इंद्रियों पर नियंत्रण

आत्मा का साक्षात्कार

दुःखों से मुक्ति

मोक्ष की प्राप्ति

 राज योग के 8 अंग (अष्टांग योग)

1️⃣ यम (नैतिक अनुशासन – समाज के लिए)

पाँच यम होते हैं:

अहिंसा – किसी को मन, वचन, कर्म से चोट न पहुँचाना

सत्य – सत्य बोलना

अस्तेय – चोरी न करना

ब्रह्मचर्य – इंद्रिय संयम

अपरिग्रह – संग्रह न करना, लोभ से दूर रहना

2️⃣ नियम (व्यक्तिगत अनुशासन – स्वयं के लिए)

पाँच नियम:

शौच – बाहरी व आंतरिक शुद्धता

संतोष – जो मिले उसमें संतुष्ट रहना

तप – अनुशासन और साधना

स्वाध्याय – आत्म अध्ययन, शास्त्र अध्ययन

ईश्वर प्रणिधान – ईश्वर में समर्पण

3️⃣ आसन (शरीर की स्थिरता)

शरीर को स्वस्थ और स्थिर बनाता है

ध्यान के लिए शरीर तैयार करता है
उदाहरण: पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन

4️⃣ प्राणायाम (श्वास नियंत्रण)

प्राण शक्ति का संतुलन

मन को शांति देता है
प्रमुख प्राणायाम:
अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका, नाड़ी शोधन

5️⃣ प्रत्याहार (इंद्रियों की वापसी)

इंद्रियों को विषयों से हटाकर मन में लाना

बाहरी आकर्षणों से मुक्ति

6️⃣ धारणा (एकाग्रता)

मन को एक बिंदु पर स्थिर करना

जैसे: ज्योति, मंत्र, श्वास पर ध्यान

7️⃣ ध्यान (Meditation)

निरंतर, अविच्छिन्न ध्यान

मन शांत और निर्मल होता है

8️⃣ समाधि (परम अवस्था)

साधक और साध्य का भेद मिट जाता है

आत्मा और परमात्मा का एकत्व अनुभव

 राज योग के लाभ

मानसिक शांति

तनाव और चिंता से मुक्ति

एकाग्रता व स्मरण शक्ति में वृद्धि

चरित्र निर्माण

आत्मिक उन्नति

 राज योग किसके लिए उपयुक्त?

विद्यार्थी

ध्यान साधक

मानसिक अशांति से पीड़ित लोग

आत्मज्ञान की खोज करने वाले

राज योग और आधुनिक जीवन

आज के तनावपूर्ण जीवन में राज योग:

मन को स्थिर करता है

निर्णय क्षमता बढ़ाता है

जीवन में संतुलन लाता है

राज योग का सार

“मन जीतो, संसार अपने आप जीत लिया जाएगा।”


https://youtu.be/ghBjzmETUMg?si=i8f60nuqP6E84GpL