कर्तव्य ही जीवन है।
1. जीवन का प्रथम कर्तव्य जीवन का आरंभ माँ के स्तनपान से होता है।यह केवल पोषण नहीं, बल्कि जीवन को स्वीकार करने की प्रक्रिया है।शिशु का स्तनप…
Insights, stories and learnings — yoga, wellness & spirituality
1. जीवन का प्रथम कर्तव्य जीवन का आरंभ माँ के स्तनपान से होता है।यह केवल पोषण नहीं, बल्कि जीवन को स्वीकार करने की प्रक्रिया है।शिशु का स्तनप…
1. प्रेम एवं भक्ति का दिव्य स्वरूप प्रेम और भक्ति वह पवित्र मार्ग हैं जो भक्त के हृदय को ईश्वर से जोड़ते हैं।जब प्रेम निष्कलुष होता है और भ…
1. समय और प्रभु की एकता समय की शक्ति के समान ही प्रभु की शक्ति अनंत है।समय चलता है क्योंकि प्रभु की इच्छा कार्यरत है।जो जन्म देता है, बढ़ात…
1) अवतारों का अनंत रहस्य युग-युग में प्रभु के अवतार होते रहे हैं और होते रहेंगे।उनके कर्मों की सीमा मनुष्य की समझ से परे है।कौन कब आएगा, कब…
1. सृजन और चेतना के आधार प्रभु चेतन और अचेतन दोनों को जीवन देने वाले प्रभु सर्वशक्तिमान हैं।उनकी शक्ति से ही निर्जीव में भी गति और चेतना का…
1. सृजनकर्ता ईश्वर ईश्वर ही इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड के सृजनकर्ता हैं।जड़ और चेतन, दृश्य और अदृश्य—सब उन्हीं की रचना है।सूर्य, चंद्र, पृथ्वी औ…
1. पंचतत्व: सृष्टि के मूल आभूषण अग्नि, जल, वायु, धरती और आकाश—ये पाँच तत्व समस्त प्राणियों के लिए आभूषण समान हैं।इनसे ही जीवन की रचना, संरक…
1. मकड़ी और उसका जाल: आत्मनिर्भर सृजन मकड़ी अपने ही शरीर से निकले द्रव्य से जाल का निर्माण करती है।यह जाल न बाहर से आता है, न किसी और पर नि…