भूख-प्यास तृप्ति देती है, क्रोध केवल विनाश
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 20, 2026

भूख-प्यास तृप्ति देती है, क्रोध केवल विनाश

1️⃣ प्रस्तावना – जीवन की स्वाभाविक आवश्यकताएँ मनुष्य का जीवन कुछ मूलभूत आवश्यकताओं पर आधारित होता है। जैसे प्यास लगने पर पानी पीना …

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क्रोध की अग्नि विवेक को नष्ट कर, जीवन की सही दिशा को भटका देती है
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 19, 2026

क्रोध की अग्नि विवेक को नष्ट कर, जीवन की सही दिशा को भटका देती है

  1️⃣ क्रोध – सत्य के मार्ग से विचलित करने वालासत्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति भी जब क्रोध के प्रभाव में आता है, तो उसका…

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क्रोध – क्षमता का अंधकार, संयम – सफलता का प्रकाश
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 18, 2026

क्रोध – क्षमता का अंधकार, संयम – सफलता का प्रकाश

  1️⃣ क्रोध – क्षमता को ढकने वाला पर्दा क्रोध मनुष्य की आंतरिक क्षमता पर एक मोटा पर्दा डाल देता है। जब व्यक्ति क्रोधित होता है, तब उसकी वा…

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क्रोध पर विजय ही जीवन की सच्ची जीत है
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 17, 2026

क्रोध पर विजय ही जीवन की सच्ची जीत है

1️⃣ क्रोध – विचारों का विनाशक क्रोध सबसे पहले मनुष्य की सोच पर प्रहार करता है। जब व्यक्ति क्रोधित होता है, तब उसकी सोचने और समझने की शक्ति …

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क्रोध – जीवन का शत्रु
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 16, 2026

क्रोध – जीवन का शत्रु

1️⃣ क्रोध – मन का अंधकारसृष्टि के सृजनकर्ता ईश्वर ने मनुष्य को विवेक, धैर्य और प्रेम का वरदान दिया है ताकि वह संतुलित और सुखमय जीवन जी सके। …

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अहंकार का अंधकार और समर्पण का प्रकाश”
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 14, 2026

अहंकार का अंधकार और समर्पण का प्रकाश”

1️⃣ अहंकार – सत्य से दूर ले जाने वाला ईश्वर ने इस संसार को अत्यंत सुंदर और संतुलित बनाया है। जब मनुष्य के भीतर अहंकार उत्पन्न होता है, तब व…

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जहाँ अहंकार होता है, वहाँ सम्मान और संबंध धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 13, 2026

जहाँ अहंकार होता है, वहाँ सम्मान और संबंध धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं

1️⃣ अहंकार – विवेक का नाश जब किसी व्यक्ति के भीतर अहंकार बढ़ जाता है, तब उसका विवेक धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। वह अपने निर्णयो…

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अहंकार मनुष्य को सत्य और संस्कार से दूर कर देता है
ब्रह्मलीन सद्गुरु खुमन पोरैतोंन March 12, 2026

अहंकार मनुष्य को सत्य और संस्कार से दूर कर देता है

  1️⃣ अहंकार – विवेक का नाश जब मनुष्य के भीतर अहंकार बढ़ जाता है, तब उसका विवेक धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। वह स्वयं को …

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