भूख-प्यास तृप्ति देती है, क्रोध केवल विनाश
1️⃣ प्रस्तावना – जीवन की स्वाभाविक आवश्यकताएँ मनुष्य का जीवन कुछ मूलभूत आवश्यकताओं पर आधारित होता है। जैसे प्यास लगने पर पानी पीना …
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1️⃣ प्रस्तावना – जीवन की स्वाभाविक आवश्यकताएँ मनुष्य का जीवन कुछ मूलभूत आवश्यकताओं पर आधारित होता है। जैसे प्यास लगने पर पानी पीना …
1️⃣ क्रोध – सत्य के मार्ग से विचलित करने वालासत्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति भी जब क्रोध के प्रभाव में आता है, तो उसका…
1️⃣ क्रोध – क्षमता को ढकने वाला पर्दा क्रोध मनुष्य की आंतरिक क्षमता पर एक मोटा पर्दा डाल देता है। जब व्यक्ति क्रोधित होता है, तब उसकी वा…
1️⃣ क्रोध – विचारों का विनाशक क्रोध सबसे पहले मनुष्य की सोच पर प्रहार करता है। जब व्यक्ति क्रोधित होता है, तब उसकी सोचने और समझने की शक्ति …
1️⃣ क्रोध – मन का अंधकारसृष्टि के सृजनकर्ता ईश्वर ने मनुष्य को विवेक, धैर्य और प्रेम का वरदान दिया है ताकि वह संतुलित और सुखमय जीवन जी सके। …
1️⃣ अहंकार – सत्य से दूर ले जाने वाला ईश्वर ने इस संसार को अत्यंत सुंदर और संतुलित बनाया है। जब मनुष्य के भीतर अहंकार उत्पन्न होता है, तब व…
1️⃣ अहंकार – विवेक का नाश जब किसी व्यक्ति के भीतर अहंकार बढ़ जाता है, तब उसका विवेक धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। वह अपने निर्णयो…
1️⃣ अहंकार – विवेक का नाश जब मनुष्य के भीतर अहंकार बढ़ जाता है, तब उसका विवेक धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। वह स्वयं को …