कर्तव्य ही जीवन है।
1. जीवन का प्रथम कर्तव्य जीवन का आरंभ माँ के स्तनपान से होता है।यह केवल पोषण नहीं, बल्कि जीवन को स्वीकार करने की प्रक्रिया है।शिशु का स्तनप…
Insights, stories and learnings — yoga, wellness & spirituality
1. जीवन का प्रथम कर्तव्य जीवन का आरंभ माँ के स्तनपान से होता है।यह केवल पोषण नहीं, बल्कि जीवन को स्वीकार करने की प्रक्रिया है।शिशु का स्तनप…
1. प्रेम एवं भक्ति का दिव्य स्वरूप प्रेम और भक्ति वह पवित्र मार्ग हैं जो भक्त के हृदय को ईश्वर से जोड़ते हैं।जब प्रेम निष्कलुष होता है और भ…
मंत्र योग वह योग मार्ग है जिसमें पवित्र शब्दों (मंत्रों) के नियमित जप से मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध किया जाता है। मंत्र की ध्वनि-तरंगें ह…
1. समय और प्रभु की एकता समय की शक्ति के समान ही प्रभु की शक्ति अनंत है।समय चलता है क्योंकि प्रभु की इच्छा कार्यरत है।जो जन्म देता है, बढ़ात…
1) अवतारों का अनंत रहस्य युग-युग में प्रभु के अवतार होते रहे हैं और होते रहेंगे।उनके कर्मों की सीमा मनुष्य की समझ से परे है।कौन कब आएगा, कब…
राज योग को योगों का राजा कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे मन के नियंत्रण, आत्मसंयम और आत्मसाक्षात्कार से संबंधित है।महर्षि पतंजलि द्वारा रचित यो…
कुंडलिनी योग वह आध्यात्मिक साधना है जिसमें रीढ़ की हड्डी के मूल (मूलाधार चक्र) में स्थित सुप्त दिव्य शक्ति कुंडलिनी को जाग्रत किया जाता है।य…
ज्ञान योग आत्मज्ञान और सत्य की अनुभूति का मार्ग है। यह योग मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर तथा बंधन से मुक्ति की ओर ले जाता है। इसमें बुद्धि…