जहाँ प्राण प्रबल, वहाँ कार्य सफल
1. सुमेरु जैसा प्राणतत्व जिस प्रकार माला के दोनों छोर सुमेरु द्वारा जुड़कर एक पूर्ण रूप धारण करते हैं,उसी प्रकार मन और बुद्धि के विचारों को…
Insights, stories and learnings — yoga, wellness & spirituality
1. सुमेरु जैसा प्राणतत्व जिस प्रकार माला के दोनों छोर सुमेरु द्वारा जुड़कर एक पूर्ण रूप धारण करते हैं,उसी प्रकार मन और बुद्धि के विचारों को…
1. वायु की तरह अदृश्य, पर जीवन का आधार—प्राण जिस प्रकार वायु बहती है, स्पंदित होती है, हर क्षण जीवन को सहारा देती है, पर दिखाई नहीं देती—उस…
1. प्राण की अदृश्य और अपार शक्ति प्राण केवल शरीर को चलाने वाली ऊर्जा नहीं है, बल्कि वह वही शक्तिशाली तत्व है जो प्राणनाथ के समान पूरे जीवन …
1. प्राण की शक्ति ‘प्राण’ मनुष्य के जीवन में वही शक्ति रखता है जैसी ‘प्राणनाथ’ की—दोनों ही अत्यन्त प्रभावशाली और जीवन को संचालित करने वाले …
1. परिवर्तन प्रकृति का नियम जिस प्रकार समय आने पर साँप अपनी पुरानी केंचुली त्यागकर नया रूप धारण करता है, उसी प्रकार इस संसार में परिवर्तन स…
1. प्राण का अनंत एवं अविनाशी स्वरूप प्राण वही शक्ति है जो वायु की भांति अनंत, अनादि और असीम है। जैसे वायु का वास्तविक अस्तित्व कभी समाप्त न…
1. नदी और प्राण का अनवरत प्रवाह नदी की धाराएँ सदा बहती रहती हैं। उनका प्रवाह कभी रुकता नहीं, चाहे मार्ग में कितनी ही बाधाएँ क्यों न आएँ। उस…
1. परमात्मा की सर्वव्यापकता परमात्मा सर्वव्यापी हैं, अर्थात वे प्रत्येक जीव, प्रत्येक अणु और सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं। उनका अस्तित्व…