जहाँ प्राण प्रबल, वहाँ कार्य सफल

जहाँ प्राण प्रबल, वहाँ कार्य सफल

1. सुमेरु जैसा प्राणतत्व

जिस प्रकार माला के दोनों छोर सुमेरु द्वारा जुड़कर एक पूर्ण रूप धारण करते हैं,
उसी प्रकार मन और बुद्धि के विचारों को जोड़ने, संतुलित करने और दिशा देने का कार्य प्राणतत्व करता है।

2. प्राण—विचारों का आधार

मन संकल्प देता है और बुद्धि निर्णय,
परंतु दोनों को सक्रिय, स्थिर और प्रभावी बनाने की मूल शक्ति प्राण है।
प्राण के बिना विचार पूर्ण नहीं हो पाते।

3. कार्य की सफलता प्राणों से निर्धारित

किसी भी कार्य की योग्यता, पूर्णता, क्षमता और परिणाम
अंततः प्राणों की शक्ति, स्थिरता और संतुलन पर निर्भर होते हैं।

4. प्राणतत्व—जीवन का केंद्र

प्राण वह केंद्र है जो मन, बुद्धि और कर्म को
एकसूत्र में बाँधकर जीवन को दिशा देता है।
इसलिए प्राणतत्व को सुमेरु के समान जीवन का आधार कहा गया है।