कर्म योग योग का वह मार्ग है जिसमें मनुष्य अपने दैनिक जीवन के प्रत्येक कर्म को ईश्वर-अर्पण भाव से करता है। इसका मूल सिद्धांत है—कर्म करना हमारा अधिकार है, फल की आसक्ति नहीं। कर्म योग सिखाता है कि कर्तव्य का पालन निःस्वार्थ भाव से किया जाए और कर्म के फल को ईश्वर पर छोड़ दिया जाए।
कर्म योग का अर्थ
‘कर्म’ का अर्थ है कार्य और ‘योग’ का अर्थ है जुड़ना। इस प्रकार कर्म योग का शाब्दिक अर्थ हुआ—कर्म के माध्यम से ईश्वर या परम सत्य से जुड़ना। जब व्यक्ति बिना स्वार्थ, अहंकार और फल की इच्छा के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, तब वही कर्म योग कहलाता है।
कर्म योग का उद्देश्य
कर्म योग का उद्देश्य मनुष्य के भीतर से स्वार्थ, अहंकार और आसक्ति को समाप्त करना है। यह योग जीवन को पवित्र बनाकर आत्मा को शुद्ध करता है और व्यक्ति को मानसिक शांति तथा संतुलन प्रदान करता है।
कर्म योग के प्रमुख सिद्धांत
निष्काम भाव से कर्म करना
कर्म को ईश्वर को समर्पित करना
फल की इच्छा और चिंता का त्याग
कर्तव्य को ही धर्म मानना
सेवा भावना के साथ कार्य करना
कर्म योग का महत्व
कर्म योग गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाता है। यह बताता है कि संसार में रहते हुए, अपने दायित्व निभाते हुए भी मोक्ष की प्राप्ति संभव है। कर्म योग मनुष्य को सक्रिय, जिम्मेदार और विनम्र बनाता है।
कर्म योग का उदाहरण
एक शिक्षक का निष्ठा से पढ़ाना, एक विद्यार्थी का ईमानदारी से अध्ययन करना, एक किसान का परिश्रमपूर्वक खेती करना—यदि ये कार्य फल की चिंता किए बिना किए जाएँ, तो वे सभी कर्म योग के उदाहरण हैं।
निष्कर्ष
कर्म योग जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है। यह सिखाता है कि कर्तव्य ही पूजा है और सेवा ही साधना। कर्म योग अपनाकर मनुष्य सांसारिक जीवन में रहते हुए भी आत्मिक शांति और परम लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सकता है।