इंद्रियों की अतृप्त इच्छाएँ और मानव जीवन
मनुष्य की इंद्रियाँ — आँख, नाक, कान, जीभ और स्पर्श — स्वभाव से कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होतीं। ये बार-बार नए अनुभवों की चाह में लगी रहती हैं, और यही चाह व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती हैदेखने की अतृप्त चाह
आँखों ने एक दृश्य देखा, लेकिन मन फिर भी नया देखने को लालायित रहता है। सुंदरता का आकर्षण कभी समाप्त नहीं होता, और यही चाह मन को भटकाती रहती है।सुगंध की लालसा
नाक ने किसी सुगंध को महसूस किया, परंतु वह फिर भी नई-नई खुशबुओं की तलाश में रहती है। यह खोज कभी खत्म नहीं होती।सुनने की अनंत इच्छा
कानों ने मधुर ध्वनि सुनी, फिर भी मन और अधिक सुनना चाहता है। यह निरंतर चाह व्यक्ति को स्थिर नहीं रहने देती।स्वाद की तृष्णा
जीभ ने स्वाद का अनुभव किया, लेकिन वह और स्वादों की ओर आकर्षित होती रहती है। यह तृष्णा नियंत्रण से बाहर हो जाए तो शरीर और मन दोनों को प्रभावित करती है।