1. उत्तरदायित्व का दुर्लभ भाव
जो लोग मन लगाकर किसी कार्य का उत्तरदायित्व लेते हैं, वही जीवन में अपनी विशेष पहचान बनाते हैं।
ऐसे व्यक्तित्व समाज में आदर्श माने जाते हैं।
2. भय ही परिश्रम का प्रेरक
लोग अक्सर भूख या अभाव के डर से ही अधिक मेहनत करते हैं।
यही डर उन्हें लक्ष्य तक पहुँचने की शक्ति देता है।
3. कर्तव्यों की कृपा ही सफलता का आधार
जीवन में कर्तव्य-निष्ठा के बिना कोई उपलब्धि पूर्ण नहीं हो सकती।
कर्तव्य ही सफलता का मूल आधार बनता है।
4. पूर्वजन्म के कर्मों का परिणाम
किसी भी कार्य की पूर्णता में पूर्वजन्म के कर्मों का प्रभाव भी जुड़ा होता है।
भाग्य और कर्म मिलकर ही श्रेष्ठ परिणाम देते हैं।
5. पूर्णता वही जहाँ मन, कर्म और विश्वास एक हों
जब मन, कर्म और विश्वास एक दिशा में कार्य करते हैं, तभी कार्य सिद्धि प्राप्त होती है।
समर्पण ही पूर्णता की सबसे बड़ी शक्ति है।